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समास की परिभाषा, भेद और उदाहरण: 6 प्रकारों को आसान भाषा में समझें

समास परिभाषा, भेद और उदाहरण: 6 आसान प्रकार व शानदार ट्रिक्स

Table of Contents

समास (Samas) हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण विषय है। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे TET, CTET, UPTET, PGT, TGT, SSC और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में समास से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए समास की परिभाषा, भेद, समस्त पद और समास-विग्रह को समझना बहुत जरूरी है।

इस लेख में Gyan Mahal के माध्यम से समास की परिभाषा, इसके 6 प्रमुख भेद, पहचानने के आसान तरीके और महत्वपूर्ण उदाहरण सरल भाषा में दिए गए हैं।

समास क्या है?

दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर संक्षिप्त रूप में एक नया शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।

समास से बने हुए शब्द को समस्त पद कहा जाता है और समस्त पद को अलग-अलग करके उसका अर्थ स्पष्ट करने की प्रक्रिया को समास-विग्रह कहते हैं।

उदाहरण

राजा का पुत्र → राजपुत्र

यहाँ ‘राजा का पुत्र’ का संक्षिप्त रूप राजपुत्र है। इसलिए ‘राजपुत्र’ समस्त पद है और ‘राजा का पुत्र’ इसका समास-विग्रह है।

इसी प्रकार:

  • रसोई + घर = रसोईघर
  • देश + वासी = देशवासी
  • विद्या + धन = विद्याधन
  • घोड़े + दौड़ = घुड़दौड़

समास के प्रमुख भेद

हिंदी व्याकरण में समास के 6 प्रमुख भेद माने जाते हैं:

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वंद्व समास
  5. कर्मधारय समास
  6. बहुव्रीहि समास

1. अव्ययीभाव समास

जिस समास में पूर्वपद प्रधान होता है और पूर्वपद प्रायः अव्यय होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।

इसमें समस्त पद का प्रयोग प्रायः अव्यय के रूप में होता है।

अव्ययीभाव समास की पहचान

  • पूर्वपद प्रधान होता है।
  • पूर्वपद प्रायः अव्यय होता है।
  • विग्रह में ‘के अनुसार’, ‘भर’, ‘हर’, ‘तक’ आदि भाव मिल सकते हैं।

अव्ययीभाव समास के उदाहरण

समस्त पदसमास-विग्रह
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
प्रतिदिनहर दिन
आजीवनजीवन भर
यथासंभवजैसा संभव हो
आमरणमरण तक
भरपेटपेट भरकर

उदाहरण:
‘यथाशक्ति’ का अर्थ है शक्ति के अनुसार।


2. तत्पुरुष समास

जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच आने वाली कारक-विभक्ति का लोप हो जाता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

तत्पुरुष समास में कारक के आधार पर इसके कई भेद माने जाते हैं।

तत्पुरुष समास के भेद और उदाहरण

भेदसमस्त पदसमास-विग्रह
कर्म तत्पुरुषबसचालकबस को चलाने वाला
कर्म तत्पुरुषगगनचुंबीगगन को चूमने वाला
करण तत्पुरुषमदांधमद से अंधा
करण तत्पुरुषहस्तलिखितहाथ से लिखित
करण तत्पुरुषरेखांकितरेखा द्वारा अंकित
संप्रदान तत्पुरुषपरीक्षा भवनपरीक्षा के लिए भवन
संप्रदान तत्पुरुषहवनसामग्रीहवन के लिए सामग्री
अपादान तत्पुरुषऋणमुक्तऋण से मुक्त
अपादान तत्पुरुषभयभीतभय से भीत
संबंध तत्पुरुषघुड़दौड़घोड़ों की दौड़
संबंध तत्पुरुषगृहस्वामीगृह का स्वामी
संबंध तत्पुरुषपूँजीपतिपूँजी का पति
अधिकरण तत्पुरुषजलमग्नजल में मग्न
अधिकरण तत्पुरुषनीतिनिपुणनीति में निपुण
अधिकरण तत्पुरुषशरणागतशरण में आगत

आसान पहचान

यदि विग्रह करते समय को, से, के लिए, का/की/के, में/पर आदि कारक चिह्न प्राप्त हों और उनका लोप हुआ हो, तो वह प्रायः तत्पुरुष समास होता है।


3. द्विगु समास

जिस समास का पूर्वपद संख्यावाचक होता है और पूरा समस्त पद किसी समूह या समाहार का बोध कराता है, उसे द्विगु समास कहते हैं।

द्विगु समास की पहचान

  • पहला पद संख्या बताता है।
  • पूरा शब्द किसी समूह या समाहार का बोध कराता है।
  • विग्रह में ‘का समूह’ या ‘का समाहार’ जैसे शब्द आ सकते हैं।

उदाहरण

समस्त पदसमास-विग्रह
त्रिभुवनतीन भुवनों का समूह
चौमासाचार मासों का समूह
पंचतंत्रपाँच तंत्रों का समूह
सप्तऋषिसात ऋषियों का समूह
नवरत्ननौ रत्नों का समूह
पंचवटीपाँच वटों का समूह

याद रखें: संख्या + समूह/समाहार का भाव = द्विगु समास


4. द्वंद्व समास

जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और उनके बीच ‘और’, ‘तथा’ आदि शब्द लगाए जा सकते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।

द्वंद्व समास की पहचान

विग्रह करते समय यदि दोनों पदों के बीच ‘और’ या ‘तथा’ लगाया जा सके, तो वह द्वंद्व समास हो सकता है।

उदाहरण

समस्त पदसमास-विग्रह
राम-लक्ष्मणराम और लक्ष्मण
माता-पितामाता और पिता
सुख-दुःखसुख और दुःख
दाल-रोटीदाल और रोटी
फल-फूलफल और फूल
भाई-बहनभाई और बहन

5. कर्मधारय समास

जिस समास में पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है तथा दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।

कर्मधारय समास में कई बार उपमान और उपमेय का संबंध भी पाया जाता है।

कर्मधारय समास के उदाहरण

समस्त पदसमास-विग्रह
महात्मामहान है जो आत्मा
स्वर्णकमलस्वर्ण का है जो कमल
नीलकमलनीला है जो कमल
पीताम्बरपीला है जो अम्बर
घनश्यामघन के समान श्याम
कमलनयनकमल के समान नयन
मुखचंद्रमुख रूपी चंद्र

आसान पहचान

यदि एक पद दूसरे पद की विशेषता बता रहा है, तो कर्मधारय समास होने की संभावना होती है।


6. बहुव्रीहि समास

जिस समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता और पूरा समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु या संज्ञा का विशेषण बनकर उसका बोध कराता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

बहुव्रीहि समास के विग्रह में अक्सर जिसका, जिसकी, जिसके, वाला, वाली आदि शब्द आते हैं।

बहुव्रीहि समास के उदाहरण

समस्त पदसमास-विग्रह
दशाननदस हैं आनन जिसके अर्थात् रावण
चतुर्भुजचार भुजाएँ हैं जिसकी अर्थात् विष्णु
लम्बोदरलंबा उदर है जिसका अर्थात् गणेश
चक्रपाणिचक्र है पाणि में जिसके अर्थात् विष्णु
नीलकंठनीला कंठ है जिसका अर्थात् शिव

बहुव्रीहि समास की आसान पहचान

यदि समस्त पद का अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करता है और विग्रह में ‘जिसका’, ‘जिसकी’, ‘जिसके’ आदि आते हैं, तो वह बहुव्रीहि समास होता है।


कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अंतर

इन दोनों समासों में अक्सर विद्यार्थियों को भ्रम होता है। इसे उदाहरण से समझें।

समस्त पदविग्रहसमास
नीलकंठनीला है जो कंठकर्मधारय
नीलकंठनीला कंठ है जिसका अर्थात् शिवबहुव्रीहि
पीताम्बरपीला है जो अम्बरकर्मधारय
पीताम्बरपीला अम्बर है जिसकाबहुव्रीहि

मुख्य अंतर: कर्मधारय में दोनों पदों के बीच विशेषण-विशेष्य संबंध होता है, जबकि बहुव्रीहि में पूरा समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है।


कर्मधारय और द्विगु समास में अंतर

समस्त पदविग्रहसमास
नीलाम्बरनीला है जो अम्बरकर्मधारय
पंचवटीपाँच वटों का समूहद्विगु

मुख्य अंतर: कर्मधारय में पहला पद गुणवाचक होता है, जबकि द्विगु में पहला पद संख्यावाचक होता है और समाहार का बोध कराता है।


द्विगु और बहुव्रीहि समास में अंतर

समस्त पदविग्रहसमास
त्रिनेत्रतीन नेत्रों का समूहद्विगु
त्रिनेत्रतीन नेत्र हैं जिसके अर्थात् शिवबहुव्रीहि

याद रखने की ट्रिक:
संख्या + समूह = द्विगु
संख्या + किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का बोध = बहुव्रीहि


समास की पहचान करने की आसान ट्रिक

समास पहचानने के लिए सबसे पहले उसका समास-विग्रह करें।

  • के अनुसार / हर / भर / तक → अव्ययीभाव
  • को, से, के लिए, का/की/के, में/पर → तत्पुरुष
  • संख्या + समूह/समाहार → द्विगु
  • और / तथा → द्वंद्व
  • विशेषण + विशेष्य → कर्मधारय
  • जिसका / जिसकी / जिसके / वाला → बहुव्रीहि

नोट: केवल एक पहचान-चिह्न के आधार पर निर्णय न लें। शब्द के अर्थ और उसके सही विग्रह को भी देखें।


परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण उदाहरण

1. ‘देश की भक्ति’ का समास क्या है?

उत्तर: तत्पुरुष समास
विग्रह: देश की भक्ति

2. ‘युद्ध में निपुण’ का समास क्या है?

उत्तर: तत्पुरुष समास
विग्रह: युद्ध में निपुण

3. ‘महान है जो वीर’ का समस्त पद क्या होगा?

उत्तर: महावीर
समास: कर्मधारय

4. ‘सत् है जो धर्म’ का समस्त पद क्या होगा?

उत्तर: सद्धर्म
समास: कर्मधारय

5. ‘राम और लक्ष्मण’ का समस्त पद क्या होगा?

उत्तर: राम-लक्ष्मण
समास: द्वंद्व


समास का महत्व

समास हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण अध्याय है। इससे शब्दों को संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से लिखने में सहायता मिलती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में समास की परिभाषा, समास-विग्रह, समास के भेद और उदाहरणों पर आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

Gyan Mahal पर हिंदी व्याकरण के साथ-साथ Computer, MS Office, Tally, Programming, Web Designing और अन्य शैक्षणिक विषयों की उपयोगी जानकारी भी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।


निष्कर्ष

समास में दो या दो से अधिक पदों को मिलाकर एक संक्षिप्त और अर्थपूर्ण शब्द बनाया जाता है। इसके प्रमुख भेद अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्विगु, द्वंद्व, कर्मधारय और बहुव्रीहि हैं।

यदि आप समास को आसानी से याद करना चाहते हैं, तो प्रत्येक समस्त पद का पहले विग्रह करें। विग्रह के आधार पर समास के भेद की पहचान करना काफी आसान हो जाता है।

Gyan Mahal का उद्देश्य हिंदी व्याकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों तक सरल एवं व्यवस्थित तरीके से पहुँचाना है।


समास: FAQs

1. समास किसे कहते हैं?

दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर संक्षिप्त रूप में एक नया शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।

2. समस्त पद किसे कहते हैं?

समास के द्वारा बने हुए नए शब्द को समस्त पद कहते हैं।

3. समास-विग्रह किसे कहते हैं?

समस्त पद को अलग-अलग करके उसका अर्थ स्पष्ट करने की प्रक्रिया को समास-विग्रह कहते हैं।

4. समास के कितने भेद होते हैं?

हिंदी व्याकरण में सामान्यतः समास के छह प्रमुख भेद माने जाते हैं—अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्विगु, द्वंद्व, कर्मधारय और बहुव्रीहि।

5. किस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं?

द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं।

6. किस समास में उत्तरपद प्रधान होता है?

तत्पुरुष समास में उत्तरपद प्रधान होता है।

7. किस समास में पूर्वपद प्रधान होता है?

अव्ययीभाव समास में पूर्वपद प्रधान होता है।

8. द्विगु समास की पहचान कैसे करें?

जिस समास का पहला पद संख्यावाचक हो और पूरा शब्द समूह या समाहार का बोध कराए, वह द्विगु समास होता है।

9. बहुव्रीहि समास की पहचान कैसे करें?

जिस समास में कोई भी पद प्रधान न हो और पूरा समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराए, वह बहुव्रीहि समास होता है।

10. समास का दूसरा नाम क्या है?

समास का सामान्य अर्थ संक्षेपण या संक्षिप्त रूप में शब्द-रचना करना है।




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