संधि क्या है? जानिए संधि की परिभाषा, 3 भेद, स्वर संधि के 5 प्रकार, व्यंजन व विसर्ग संधि, नियम, संधि-विच्छेद और आसान उदाहरण।
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हिंदी व्याकरण में संधि का महत्वपूर्ण स्थान है। दो निकटवर्ती वर्णों के मेल से जब उनके रूप या उच्चारण में परिवर्तन होता है, तो उसे संधि कहते हैं। हिंदी व्याकरण और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में संधि, संधि के भेद और संधि-विच्छेद से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
इस लेख में Gyan Mahal पर आप संधि की परिभाषा, उसके 3 मुख्य भेद, प्रमुख नियम, उदाहरण और संधि-विच्छेद को आसान एवं सरल भाषा में समझेंगे।
संधि क्या है? – Sandhi Kise Kahate Hain?

दो निकटवर्ती वर्णों के मेल से जब उनके रूप या उच्चारण में परिवर्तन होता है, तो उस प्रक्रिया को संधि कहते हैं।
सरल शब्दों में संधि की परिभाषा
दो वर्णों के आपस में मिलने पर होने वाले ध्वनि-परिवर्तन को संधि कहते हैं।
संधि के उदाहरण
- देव + इंद्र = देवेन्द्र
- हिम + आलय = हिमालय
- नर + इंद्र = नरेन्द्र
- सत् + जन = सज्जन
इस प्रकार, संधि में दो वर्णों या शब्दांशों के मेल से एक नया रूप बनता है।
संधि-विच्छेद क्या है?
संधि द्वारा बने हुए शब्द को उसके मूल शब्दों या वर्णों में अलग करने की प्रक्रिया को संधि-विच्छेद कहते हैं।
संधि-विच्छेद के उदाहरण
- विद्यालय = विद्या + आलय
- महेश = महा + ईश
- नरेन्द्र = नर + इंद्र
- सज्जन = सत् + जन
- मनोबल = मनः + बल
इसलिए याद रखें—
संधि = जोड़ना
संधि-विच्छेद = अलग करना
संधि के कितने भेद होते हैं?
हिंदी व्याकरण में संधि के मुख्यतः 3 भेद माने जाते हैं—
- स्वर संधि
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
इन तीनों को विस्तार से समझते हैं।
1. स्वर संधि – Swar Sandhi
जब दो स्वरों के मेल से उनमें परिवर्तन होता है, तो उसे स्वर संधि कहते हैं।
स्वर संधि के मुख्यतः 5 भेद माने जाते हैं—
- दीर्घ संधि
- गुण संधि
- वृद्धि संधि
- यण संधि
- अयादि संधि
1.1 दीर्घ संधि – Deergh Sandhi
जब दो सजातीय ह्रस्व या दीर्घ स्वर आपस में मिलते हैं और उनके स्थान पर एक दीर्घ स्वर हो जाता है, तो उसे दीर्घ संधि या सवर्णदीर्घ संधि कहते हैं।
दीर्घ संधि के नियम
- अ + अ = आ
- अ + आ = आ
- आ + अ = आ
- आ + आ = आ
- इ + इ = ई
- इ + ई = ई
- ई + इ = ई
- ई + ई = ई
- उ + उ = ऊ
- उ + ऊ = ऊ
- ऊ + उ = ऊ
- ऊ + ऊ = ऊ
दीर्घ संधि के उदाहरण
अ/आ + अ/आ = आ
- धर्म + अर्थ = धर्मार्थ
- देव + आलय = देवालय
- हिम + आलय = हिमालय
- विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
- सीमा + अंत = सीमांत
- कदा + अपि = कदापि
इ/ई + इ/ई = ई
- अति + इव = अतीव
- रवि + इंद्र = रवीन्द्र
- गिरि + ईश = गिरीश
- मुनि + ईश = मुनीश
- हरि + ईश = हरीश
उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ
- सु + उक्ति = सूक्ति
- भानु + उदय = भानूदय
- लघु + ऊर्मि = लघूर्मि
महत्वपूर्ण: दीर्घ संधि को कई पुस्तकों में सवर्णदीर्घ संधि भी कहा जाता है।
2. गुण संधि – Gun Sandhi
जब अ या आ के बाद इ, ई, उ, ऊ या ऋ आता है, तो उनके मेल से क्रमशः ए, ओ या अर् हो जाता है। इसे गुण संधि कहते हैं।
गुण संधि के नियम
- अ/आ + इ/ई = ए
- अ/आ + उ/ऊ = ओ
- अ/आ + ऋ = अर्
गुण संधि के उदाहरण
अ/आ + इ/ई = ए
- नर + इंद्र = नरेन्द्र
- सुर + इंद्र = सुरेन्द्र
- राज + इंद्र = राजेन्द्र
- देव + ईश = देवेश
- दिन + ईश = दिनेश
- महा + इंद्र = महेन्द्र
- उमा + ईश = उमेश
- लंका + ईश = लंकेश
अ/आ + उ/ऊ = ओ
- चंद्र + उदय = चंद्रोदय
- लोक + उक्ति = लोकोक्ति
- महा + उदय = महोदय
- गंगा + उदक = गंगोदक
- जल + ऊर्मि = जलोर्मि
अ/आ + ऋ = अर्
- देव + ऋषि = देवर्षि
- महा + ऋषि = महर्षि
3. वृद्धि संधि – Vriddhi Sandhi
जब अ या आ के बाद ए, ऐ, ओ या औ आता है, तो उनके मेल से क्रमशः ऐ या औ हो जाता है। इसे वृद्धि संधि कहते हैं।
वृद्धि संधि के नियम
- अ/आ + ए/ऐ = ऐ
- अ/आ + ओ/औ = औ
वृद्धि संधि के उदाहरण
अ/आ + ए/ऐ = ऐ
- मत + एकता = मतैकता
- एक + एक = एकैक
- सदा + एव = सदैव
- तथा + एव = तथैव
- मत + ऐक्य = मतैक्य
अ/आ + ओ/औ = औ
- जल + ओघ = जलौघ
- महा + ओज = महौज
- महा + औषध = महौषध
4. यण संधि – Yan Sandhi
जब इ, ई, उ, ऊ या ऋ के बाद कोई असमान स्वर आता है, तो इनके स्थान पर क्रमशः य्, व् और र् हो जाते हैं। इसे यण संधि कहते हैं।
यण संधि के नियम
- इ/ई + अन्य स्वर = य्
- उ/ऊ + अन्य स्वर = व्
- ऋ + अन्य स्वर = र्
यण संधि के उदाहरण
- इति + आदि = इत्यादि
- अति + आचार = अत्याचार
- अति + उत्तम = अत्युत्तम
- प्रति + एक = प्रत्येक
- अनु + अय = अन्वय
- मधु + आलय = मध्वालय
- अनु + एषण = अन्वेषण
5. अयादि संधि – Ayadi Sandhi
जब ए, ऐ, ओ और औ के बाद कोई अन्य स्वर आता है, तो क्रमशः अय्, आय्, अव् और आव् हो जाते हैं। इसे अयादि संधि कहते हैं।
अयादि संधि के नियम
- ए + अन्य स्वर = अय्
- ऐ + अन्य स्वर = आय्
- ओ + अन्य स्वर = अव्
- औ + अन्य स्वर = आव्
अयादि संधि के उदाहरण
- ने + अन = नयन
- शे + अन = शयन
- गै + अक = गायक
- भो + अन = भवन
- पौ + अक = पावक
- नौ + इक = नाविक
2. व्यंजन संधि – Vyanjan Sandhi
जब किसी व्यंजन का मेल किसी स्वर या दूसरे व्यंजन से होता है और उसके कारण व्यंजन के रूप या उच्चारण में परिवर्तन होता है, तो उसे व्यंजन संधि कहते हैं।
व्यंजन संधि के प्रमुख उदाहरण
- दिक् + गज = दिग्गज
- वाक् + ईश = वागीश
- जगत् + ईश = जगदीश
- सत् + जन = सज्जन
- उत् + हार = उद्धार
- जगत् + नाथ = जगन्नाथ
- उत् + चारण = उच्चारण
- उत् + डयन = उड्डयन
- उत् + लास = उल्लास
- सत् + भावना = सद्भावना
- तत् + रूप = तद्रूप
- भगवत् + भक्ति = भगवद्भक्ति
व्यंजन संधि के महत्वपूर्ण नियम
त् + ग/घ/द/ध आदि
कुछ स्थितियों में त् का परिवर्तन द् में हो जाता है।
उदाहरण:
- सत् + भावना = सद्भावना
- जगत् + ईश = जगदीश
- तत् + रूप = तद्रूप
- भगवत् + भक्ति = भगवद्भक्ति
त् + च/छ/ज आदि
कुछ स्थितियों में त् के परिवर्तन से संयुक्त व्यंजन बनता है।
- उत् + चारण = उच्चारण
- सत् + जन = सज्जन
- उत् + छेद = उच्छेद
- उत् + ज्वल = उज्ज्वल
त् + ह
त् के स्थान पर द् और ह के स्थान पर ध् हो जाता है।
- उत् + हार = उद्धार
- उत् + हरण = उद्धरण
- तत् + हित = तद्धित
त् + ल
त् का परिवर्तन ल् में होकर संयुक्त व्यंजन बनता है।
- उत् + लास = उल्लास
- तत् + लीन = तल्लीन
म् का परिवर्तन
म् के बाद विभिन्न वर्गों के व्यंजन आने पर प्रायः अनुस्वार का प्रयोग होता है।
- सम् + गम = संगम
- सम् + चय = संचय
- सम् + तोष = संतोष
- सम् + पूर्ण = संपूर्ण
- सम् + कल्प = संकल्प
म् + म के मेल से म्म बनता है।
- सम् + मति = सम्मति
- सम् + मान = सम्मान
3. विसर्ग संधि – Visarg Sandhi
जब किसी शब्द के अंत में विसर्ग (ः) हो और उसके बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग के रूप में परिवर्तन होता है, तो उसे विसर्ग संधि कहते हैं।
विसर्ग संधि के प्रमुख उदाहरण
- मनः + अनुकूल = मनोनुकूल
- मनः + बल = मनोबल
- तपः + भूमि = तपोभूमि
- निः + चय = निश्चय
- निः + चल = निश्चल
- निः + फल = निष्फल
- नमः + ते = नमस्ते
- दुः + साहस = दुस्साहस
विसर्ग संधि के महत्वपूर्ण नियम
1. विसर्ग + च/छ
विसर्ग का परिवर्तन श् में हो जाता है।
- निः + चय = निश्चय
- तपः + चर्या = तपश्चर्या
- ज्योतिः + चक्र = ज्योतिश्चक्र
2. विसर्ग + ट/ठ/ष
विसर्ग का परिवर्तन ष् में हो जाता है।
- चतुः + षष्टि = चतुष्षष्टि
- धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
3. विसर्ग + त/थ
कुछ स्थितियों में विसर्ग का परिवर्तन स् में हो जाता है।
- नमः + ते = नमस्ते
- दुः + तर = दुस्तर
- निः + तेज = निस्तेज
4. विसर्ग + क/ख/प/फ
कुछ परिस्थितियों में विसर्ग ष् में बदल जाता है।
- निः + कलंक = निष्कलंक
- निः + कपट = निष्कपट
- निः + फल = निष्फल
- चतुः + पथ = चतुष्पथ
5. विसर्ग + स
विसर्ग के स्थान पर स् आकर संयुक्त रूप बन सकता है।
- निः + संतान = निस्संतान
- दुः + स्वप्न = दुस्स्वप्न
- निः + स्वार्थ = निस्स्वार्थ
6. विसर्ग के बाद स्वर या कुछ घोष वर्ण
कुछ परिस्थितियों में विसर्ग का परिवर्तन ओ में हो जाता है।
- मनः + अभिलाषा = मनोरभिलाषा
- मनः + योग = मनोयोग
- वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
- अधः + भाग = अधोभाग
- तपः + भूमि = तपोभूमि
7. विसर्ग + र
कुछ शब्दों में विसर्ग का लोप होकर पूर्व स्वर दीर्घ हो जाता है।
- निः + रव = नीरव
- निः + रस = नीरस
- निः + रज = नीरज
संधि और संधि-विच्छेद में अंतर
| संधि | संधि-विच्छेद |
|---|---|
| दो वर्णों/शब्दांशों को मिलाने की प्रक्रिया | मिले हुए शब्द को अलग करने की प्रक्रिया |
| धर्म + अर्थ = धर्मार्थ | धर्मार्थ = धर्म + अर्थ |
| नर + इंद्र = नरेन्द्र | नरेन्द्र = नर + इंद्र |
| सत् + जन = सज्जन | सज्जन = सत् + जन |
| मनः + बल = मनोबल | मनोबल = मनः + बल |
याद रखने का आसान तरीका:
संधि = जोड़ना और संधि-विच्छेद = तोड़कर अलग करना।
संधि और समास में अंतर
संधि में मुख्य रूप से दो वर्णों के मेल से होने वाले ध्वनि-परिवर्तन पर ध्यान दिया जाता है, जबकि समास में दो या दो से अधिक शब्दों को संक्षिप्त करके एक नया शब्द बनाया जाता है।
उदाहरण
संधि:
नर + इंद्र = नरेन्द्र
समास:
राजा का पुत्र = राजपुत्र
इसलिए संधि और समास को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।
संधि के 20 महत्वपूर्ण उदाहरण
प्रतियोगी परीक्षाओं और हिंदी व्याकरण की तैयारी के लिए ये उदाहरण महत्वपूर्ण हैं—
- हिम + आलय = हिमालय
- विद्या + आलय = विद्यालय
- नर + इंद्र = नरेन्द्र
- महा + ईश = महेश
- सदा + एव = सदैव
- तथा + एव = तथैव
- इति + आदि = इत्यादि
- प्रति + एक = प्रत्येक
- अनु + अय = अन्वय
- सम् + तोष = संतोष
- सत् + जन = सज्जन
- जगत् + ईश = जगदीश
- उत् + हार = उद्धार
- दिक् + गज = दिग्गज
- मनः + बल = मनोबल
- निः + चय = निश्चय
- निः + फल = निष्फल
- नमः + ते = नमस्ते
- दुः + साहस = दुस्साहस
- तपः + भूमि = तपोभूमि
संधि से संबंधित महत्वपूर्ण FAQs
1. संधि किसे कहते हैं?
दो निकटवर्ती वर्णों के मेल से जब उनके रूप या उच्चारण में परिवर्तन होता है, तो उस प्रक्रिया को संधि कहते हैं।
उदाहरण:
नर + इंद्र = नरेन्द्र
2. संधि कितने प्रकार की होती है?
संधि के मुख्यतः 3 भेद होते हैं—
- स्वर संधि
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
3. स्वर संधि के कितने भेद हैं?
स्वर संधि के 5 प्रमुख भेद हैं—
- दीर्घ संधि
- गुण संधि
- वृद्धि संधि
- यण संधि
- अयादि संधि
4. संधि-विच्छेद किसे कहते हैं?
संधि से बने शब्द को उसके मूल शब्दों या वर्णों में अलग करने की प्रक्रिया को संधि-विच्छेद कहते हैं।
उदाहरण:
विद्यालय = विद्या + आलय
5. ‘नरेन्द्र’ में कौन-सी संधि है?
नर + इंद्र = नरेन्द्र में गुण संधि है।
6. ‘सदैव’ में कौन-सी संधि है?
सदा + एव = सदैव में वृद्धि संधि है।
7. ‘इत्यादि’ में कौन-सी संधि है?
इति + आदि = इत्यादि में यण संधि है।
8. ‘सज्जन’ में कौन-सी संधि है?
सत् + जन = सज्जन में व्यंजन संधि है।
9. ‘मनोबल’ में कौन-सी संधि है?
मनः + बल = मनोबल में विसर्ग संधि है।
10. संधि और संधि-विच्छेद में क्या अंतर है?
संधि में दो वर्णों या शब्दांशों को जोड़कर नया रूप बनता है, जबकि संधि-विच्छेद में बने हुए शब्द को उसके मूल रूप में अलग किया जाता है।
11. संधि का उपयोग क्यों किया जाता है?
संधि का अध्ययन शब्दों के निर्माण और उनमें होने वाले ध्वनि-परिवर्तन को समझने में सहायता करता है। हिंदी व्याकरण और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसका महत्व है।
निष्कर्ष
संधि हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण और उपयोगी विषय है। इसके माध्यम से शब्दों के निर्माण में होने वाले ध्वनि-परिवर्तन को समझना आसान होता है। संधि के तीन मुख्य भेद स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि हैं।
स्वर संधि के अंतर्गत दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि संधि का अध्ययन किया जाता है। संधि के नियम और उदाहरण समझने के साथ-साथ संधि-विच्छेद का अभ्यास करना भी जरूरी है।
अगर आप हिंदी व्याकरण की तैयारी कर रहे हैं, तो वर्ण, शब्द, संज्ञा, लिंग, वचन, कारक, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और काल जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी जरूर पढ़ें।
Gyan Mahal पर हिंदी व्याकरण और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषय सरल भाषा में पढ़ें और अपनी तैयारी को और बेहतर बनाएं।
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